
एडिटर/संपादक:-तनीश गुप्ता,खण्डवा✍️
दिवाली की रात, न्याय की रोशनी, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज की कक्षा 12 वीं की नाबालिग की प्रेरक कहानी
भटकी नाबालिक बालिका को जो कल्याण समिति ने समझाकर परिजनों को सोंपा।
खंडवा। दिपावाली का माहौल था घरों में दीप जले, मिठाइयों की खुशबू फैली और हर तरफ खुशियाँ थी। लेकिन खंडवा रेलवे स्टेशन पर कुछ और ही कहानी चल रही थी। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की कक्षा 12 वीं की 17 वर्षीय नाबालिग लड़की, जिसकी आँखों में उलझन और मन में डर था, मोबाइल को लेकर अपनी बड़ी बहन से झगड़े के बाद स्कूल से ऑटो में बैठकर भाग निकली और गोरखपुर से कुशीनगर एक्सप्रेस में बैठकर मुंबई जाने की योजना बनाने लगी। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि नाबालिक बालिका अपने गुस्से और भावनाओं में इतनी उलझी हुई थी कि उसे नहीं पता था कि उसके कदम गलत दिशा में जा रहे हें, भागते-भागते लड़की की राह खंडवा रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने रोक दी और उसे सुरक्षा के लिए बाल कल्याण समिति खंडवा के समक्ष प्रस्तुत किया। दिवाली की रौशनी के बीच, अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने न्यायालय खुलवाया उन्होंने न केवल कानूनी रूप से बल्कि मानवता और संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से लड़की की स्थिति समझी। उनकी बातों में न सख्ती थी, न गुस्सा – केवल समझ और मार्गदर्शन था। धीरे-धीरे लड़की का डर कम हुआ, उसकी आँखों में रोशनी लौट आई।
लड़की ने अपने कार्य पर खुलकर स्वीकार किया कि उसने गलती की। उसने समिति को विश्वास दिलाया कि अब वह घर से अकेले नहीं निकलेगी। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि समिति के अध्यक्ष श्री शर्मा एवं समिति के सदस्यों ने उसे समझाया कि आवेश में उठाया गया कदम जीवन के लिए जोखिम भरा हो सकता है और सही निर्णय ही भविष्य बदल सकता है।फिर आया वह पल, जब लड़की को लेने उसकी वही बड़ी बहन आई, जिससे झगड़ा हुआ था। दोनों बहनों की आँखों में अब गुस्सा नहीं, बल्कि अपनापन और समझ थी। समिति ने उन्हें सकारात्मक संवाद, विश्वास और प्रेम बनाए रखने की सलाह दी।
परिजन गहराई से प्रभावित हुए और उन्होंने कहा, “शुक्रिया।” उस रात न केवल घर में दीप जल रहे थे, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और प्यार की रोशनी भी फैली।इस अवसर पर समिति के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल और स्वप्निल जैन उपस्थित रहे, मुख्य धारा में यह संदेश फैलाते हुए, प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति पहले भी समाज के सामने कई प्रेरणादायक उदाहरण ला चुकी है। इस दिवाली उन्होंने फिर दिखा दिया कि समय पर न्याय और संवेदनशील कार्यवाही से बच्चों और परिवारों की ज़िंदगी बदल सकती है।












